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पहिली ते दहावी संपूर्ण अभ्यास

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Saturday, May 28, 2022

May 28, 2022

दीपावली

             दीपावली (दीवाली) 

        हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। उनमें दीवाली की शान निराली है। आश्विन माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व, सभी पर्वो का राजा है। यह प्रकाश का पर्व है।        

        दीपावली के बारे में कई तरह की मान्यताएँ हैं। एक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान राम के लंका विजय से है। भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके अयोध्या लौटने पर अयोध्यावासियों ने रोशनी कर अपना आनंद प्रकट किया था। यह आश्विन माह की अमावस्या का दिन था तथ से हर वर्ष इस दिन दीपावली मनाई जाने लगी। धीरे-धीरे इसने त्योहार का रूप से लिया। एक मान्यता के अनुसार युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ की पूर्णाहुति की खुशी में इस त्योहार की शुरुआत हुई। जैन संप्रदाय के लोग इस दिन को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। 

         दीपावली से कुछ दिन पहले ही इस त्योहार की तैयारियों शुरू हो जाती हैं। लोग अपने-अपने घर को झाड़-पोंछकर साफ करते हैं। उसको पुताई करते और उसे सजाते हैं। लोग नए-नए कपड़े सिलाते हैं। महिलाएँ नए-नए गहने खरीदती हैं। घर-घर में पकवान और मिठाइयाँ बनती हैं। बच्चे फुलझड़ियों जलाते हैं और पटाखे फोड़ते हैं। 

       दीपावली का त्योहार-धनतेरस से भाईदूज तक- पाँच दिन चलता है। पाँचों दिन खूब धूमधाम रहती है। घरों पर रंगीन बल्बों को रोशनी की जाती है। दरवाजे पर ताजा फूल-पत्तियों के तोरण बाँधे जाते हैं आँगन और प्रवेशद्वार पर नित्य नई रंगोलियों सजाई जाती हैं। गली-मुहल्लों में पटाखों की आवाजें गूंजने लगती हैं। 

         अमावस्या की रात को दीपावली होती है। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त में व्यापारीगण लक्ष्मी जी, गणेश जी तथा बहियों की पूजा करते हैं। दीपावली के दूसरे दिन नए वर्ष का प्रारंभ होता है। लोग अपने मित्रों, संबंधियों एवं पड़ोसियों को नए वर्ष की शुभकामनाएँ देते हैं। दूर रहने वाले प्रियजनों को बधाई संदेश भेजते हैं। भाईदूज के दिन भाई अपनी बहन को उपहार देता है और बहन भाई के लिए मंगल कामना करती है। 

          दीपावली प्रकाश का सुंदर पर्व है। यह पर्व हमारे घर, आँगन और अंतःकरण को जगमगाता है। अंधेरे में उजाला फैलाने वाला यह त्योहार हमारी जिंदगी में नवजोवन का संदेश लेकर आता है।

May 28, 2022

रक्षाबंधन

                          रक्षाबंधन

 

           रक्षाबंधन हमारे देश का अति प्रिय और पवित्र त्योहार है। यह हर साल सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।

         इस त्योहार के बारे में कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार इसी दिन देवराज इंद्र की पत्नी शची ने सभी देवताओं को रक्षा सूत्र बाँधा था। इस एकता के बल पर देवताओं ने असुरों पर विजय पाई थी एक अन्य कथा के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा के दिन ऋषि-मुनि अपनी साधना की पूर्णाहुति करते थे। इस अवसर पर वे राजाओं की कलाई में राखी बाँधकर उन्हें आशीर्वाद देते थे। इसी दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि का घमंड चूर-चूर कर दिया था। इसलिए गुजरात में रक्षाबंधन के पर्व को 'बले' कहते हैं। महाराष्ट्र में यह पर्व नारियल पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है। 

          रक्षाबंधन के अवसर पर भाई बहन का स्नेह व्यक्त होता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। वह अपने भाई के मंगल की कामना करती है। भाई प्यार से बहन को कुछ उपहार देता है। रक्षाबंधन के दिन भाई बहन बचपन की यादों में खो जाते हैं। इस दिन घर घर में खुशी का वातावरण होता है

         आज समय बदल गया है। राखियों में भी व्यावसायिकता आ गई है। धन कमाने के लिए एक से बढ़कर एक कीमती राखियाँ बनाई जाती है। रक्षाबंधन के त्योहार में स्नेह और रक्षा करने की भावना का महत्त्व है, न कि कीमती राखियों का।

       रक्षाबंधन पारिवारिक एवं सामाजिक एकता का सुंदर एवं पवित्र पर्व है। स्कूल-कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए।

May 28, 2022

गणेशोत्सव

                        गणेशोत्सव 

           गणेशोत्सव भादों महीने में मनाया जाता है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी की मूर्ति की स्थापना होती है। उस दिन से लेकर चतुर्दशी तक यह उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव की विशेष महिमा है। लोकमान्य टिळक ने इस उत्सव को सार्वजनिक रूप दिया।              गणेशोत्सव की तैयारियाँ कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन लोग बड़ी धूमधाम से गणेश की मूर्ति खरीद कर लाते हैं। ये सुंदर और रंगीन मूर्तियाँ सजी हुई गाड़ियों में या सिर पर रखकर श्रद्धापूर्वक लाई जाती।लोग अपने घरों के स्वच्छ सुंदर सजे हुए स्थान पर इन मूर्तियों को स्थापना करते हैं गणपति बाप्पा मोरया की ध्वनि से सारा वातावरण गूंज उठता है।

        सार्वजनिक संस्थाएँ बड़े-बड़े भव्य मंडप बनाती हैं। इनमें बिजली के प्रकाश की सुंदर व्यवस्था को जाती है। सार्वजनिक गणेशोत्सव में गणेश जी की बड़ी और भव्य मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। मंच पर पौराणिक कथाओं के दृश्य भी खडे किए जाते हैं। वर्तमान घटनाओं को भी सांकेतिक रूप से दर्शाया जाता है। 

         उत्सव के दिनों में संध्या के समय की रौनक देखते ही बनती है। घरों तथा सार्वजनिक मंडपों में श्रद्धा एवं भक्तिभाव से गणेश जी की आरती उतारी जाती है। आरती के बाद प्रसाद बाँटा जाता है। 

        घरों में स्थापित गणेश जी की मूर्तियों अधिकतर डेढ़ दिन बाद अथवा पाँचवें या सातवें दिन समुद्र अथवा सरोवर के जल में धूमधाम से विसर्जित कर दी जाती हैं। सार्वजनिक संस्थाओं की मूर्तियाँ चतुर्दशी के दिन भव्य जुलूस एवं गाजे-बाजे के साथ समुद्र अथवा सरोवर में विसर्जित की जाती हैं। उस समय का दृश्य बहुत भव्य होता है। मूर्तियों को टूकों एवं ठेला गाड़ियों पर सजाकर विसर्जन के लिए ले जाते हैं। इस अवसर पर संगीत एवं नाच-गाने के साथ भव्य जुलूस निकाला जाता है। लोग गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या कहते हुए गणेश जी से अगले साल जल्दी दर्शन देने को प्रार्थना करते हैं। उस समय सभी का मन खुशी से नाच उठता है। गणेश विसर्जन के साथ ही यह उत्सव समाप्त हो जाता है

          गणेशोत्सव एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक उत्सव है। यह उत्सव लोगों को एकता के सूत्र से बाँधता है। गणेश जो विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धि के देवता हैं। उनका उत्सव मनाकर हम अपने जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने की कामना करते हैं।

May 28, 2022

होली

                           होली 

       होली हमारे देश के मुख्य त्योहारों में से एक है। यह हँसी-खुशी और रंगों का त्योहार है। अमीर-गरीब सभी इस त्योहार को उत्साह से मनाते हैं। यह त्योहार फागुन मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली का रंगोंभरा त्योहार वसंत ऋतु की मस्ती में चार चाँद लगा देता है।

          होली के बारे में भक्त प्रहलाद की कथा प्रचलित है। प्रहलाद के पिता हिरण्यकशिपु भगवान को नहीं मानते थे। वे एक नास्तिक व्यक्ति थे। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रहलाद भगवान का भक्त था। यह बात हिरण्यकशिपु को पसंद नहीं थी। इसलिए उन्होंने प्रहलाद को आग में जला देने का निश्चय किया। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान मिला हुआ था। भाई के आदेश पर होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर चिता में बैठ गई और आग लगा दी गई। लेकिन होलिका आग में भस्म हो गई और प्रहलाद बच गया। लोग यह देखकर दंग रह गए। आसुरी शक्ति पर दैवी शक्ति की विजय हुई। तभी से होलिकोत्सव का प्रारंभ हुआ। 

         कुछ लोग होली को रबी की फसल का त्योहार मानते हैं। उनका मानना है कि अच्छी फसल की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। होली के त्योहार की तैयारियाँ कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। बाजार रंगों एवं पिचकारियों से भर जाते हैं।

होली जलाने के लिए लकड़ियाँ इकट्ठी की जाती हैं। पूर्णिमा को शाम के समय होली जलाई जाती है। सुहागन स्त्रियाँ नारियल, कुंकुम, चावल और नए अनाज से होली की पूजा करती हैं। बच्चे, बूढ़े, नवयुवक सभी उत्साह में आकर गाने, बजाने तथा नाचने लगते हैं।

        होली के दूसरे दिन धुलेंडी मनाई जाती है। इस दिन खूब गुलाल उड़ते हैं। लोग एक-दूसरे पर रंग छिड़कते हैं। रंगों से कपड़े ही नहीं दिल भी रंगीन हो जाते हैं। लोग प्रेम से एक-दूसरे से गले मिलते हैं। होली के उत्सव में जाति-पाँति और धर्म का भेद-भाव मिट जाता है।  

        होली के साथ कुछ बुरी परंपराएँ भी जुड़ गई हैं। होली के अवसर पर कुछ लोग रंग के बजाय एक-दूसरे पर कीचड़ डालते हैं। कुछ लोग विषैले रंगों का भी प्रयोग करते हैं। ये रंग आँखों एवं त्वचा को नुकसान पहुँचाते हैं। हमें इन बुराइयों से बचना चाहिए। 

       वास्तव में होली वसंत ऋतु का रंगबिरंगा त्योहार है। यह हमारे जीवन में उल्लास और प्रेम का रंग भर देता है। सामाजिक एकता, उल्लास और उमंग की दृष्टि से होली अपने आपमें एक अनूठा त्योहार है।


May 28, 2022

आँखों देखी दुर्घटना

           आँखों देखी दुर्घटना 


        मार्च महीने के एक दिन की घटना है। रात का समय था में परीक्षा की आखिरी तैयारी में व्यस्त था। 

         इतने में अचानक आग आग दौड़ो दौड़ो बचाओ बचाओ' की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें सुनाई पड़ीं। मैंने खिड़की से झाँककर देखा सामनेवाले मकान में आग लगी हुई थी। ऊंची-ऊँची लपटें उढ़ रही थीं। लपटें देखकर दिल कोप उठा। धुएँ के बादल आसमान को छू रहे थे। हवा तेज थी, इसलिए आग जोर पकड़ रही थी। खबर फैलते ही आसपास के लोग आग बुझाने दौड़ पड़े। कोई बाल्टी से पानी फेंक रहा था, तो कोई रेत से आग बुझाने की भरसक कोशिश कर रहा था। थोड़ी देर में पुलिस भी आ गई। 

          इतने में' टन-टन-टन' की आवाज करते हुए कई दमकल वहाँ आ पहुँचे। दमकलवालों ने हल्दी ही अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने भड़कती आग पर पाइप से पानी छोड़ना शुरू कर दिया। फायरब्रिगेड के कुछ जवाने दमकल की सौड़ियों के सहारे जलते हुए मकान में घुस गए। वे तुरंत दो बच्चों और एक बेहोश महिला को मकान से बाहर से आए। दमकलवालों ने मकान में फैसे और भी कई लोगों को बचा लिया। 

        कुछ लोग आग से बुरी तरह झुलस गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल भिजवाना जरूरी था एम्बुलेंस द्वारा उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया। 

       तभी' धम्म' की आवाज के साथ जलते हुए मकान का एक हिस्सा गिर पड़ा। सौभाग्य से दमकलवालों ने सभी लोगों को मकान से बाहर निकाल लिया था। इसलिए कोई जान हानि नहीं हुई। मगर लाखों की संपत्ति जलकर राख हो गई। 

       दुर्घटनाग्रस्त मकान में रहने वाले लोगों के दिल बैठ गए थे। वे बाहर खड़े दुखी मन से अपने जलते हुए घरों की ओर देख रहे थे। वे अपने भाग्य को कोस रहे थे। 

      दमकलवालों ने पूरे दो घंटे की मेहनत के बाद आग पर काबू पा लिया। अब आग पूरी तरह बुझ चुकी थी। बाद में पता चला कि बिजली की खराबी के कारण मकान में आग लग गई थी।

       इस दुर्घटना को हुए दो महीने बीत चुके हैं। पर धू-धू करती लपटों का वह भयावह दृश्य कभी-कभी मेरी आँखों के सामने खड़ा हो जाता है।

May 28, 2022

सागर तट की एक शाम

              सागर तट की एक शाम 


         सागर के किनारे बसे शहरों के अनेक लोग शाम के समय अकसर सागर तट पर घूमने निकल जाते हैं। खास कर गर्मियों के दिनों में तो शाम को सागर तट पर लोगों का मेला लगा रहता है। सागर की बलखाती लहरों और ठंडी हवा से लोगों को बहुत राहत मिलती है। 

        पिछले रविवार की शाम को मैं भी अपने मित्रों के साथ सागर तट पर घूमने गया था। एक ओर सागर हिलोरे ले रहा था तो दूसरी ओर जन सागर उमड़ पड़ा था। रंगबिरंगे कपड़ों में सजे बच्चे उछल-कूद रहे थे। सजी-धजी छोटी-छोटी बालिकाएँ रंगीन तितलियों के समान लग रही थीं। युवक-युवतियों और बड़े-बूढ़ों की संख्या भी काफी थी। कुछ लोग सागर तट की रेत पर बैठकर गपशप कर रहे थे। कुछ लोग घूमने-फिरने में मस्त थे। कुछ लोग मोबाइल पर फिल्मी गानों का आनंद ले रहे थे। कितना सुहाना था सागर तट का वह वातावरण ! 

        कुछ दूरी पर युवकों का एक दल कबड्डी खेल रहा था। वहाँ बहुत सारे लोग देखने के लिए एकत्र हो गए थे। एक जगह एक जादूगर जादू के खेल दिखा रहा था। यहाँ बच्चे घेरा बनाकर खड़े हुए थे। वे बीच-बीच में तालियाँ बजा रहे थे। कुछ लोग एक मदारी के आसपास खड़े होकर बंदरिया का नाच देख रहे थे। बंदर मस्त होकर ढोल बजा रहा था। कुछ बच्चे गुब्बारेवाले से गुब्बारे खरीद रहे थे। कई बच्चे घुड़सवारी का मजा ले रहे थे। सागर तट पर एक जगह बहुत से स्टाल लगे हुए थे। वहाँ खूब रोशनी थी। वहाँ पर पानी-पूरी, भेल और आइसक्रीम के स्टालों पर ग्राहकों की भीड़ लगी हुई थी।

        धीरे-धीरे शाम ढलने लगी। उस समय की शोभा देखते ही बनती थी शीतल और मंद पवन के झोंके मन को प्रसन्न कर रहे थे। अस्त होते सूर्य की सुनहली किरणें सागर के जल पर मनोहर दृश्य अंकित कर रही थीं दूर समुद्र में सरकती हुई नौकाएँ बहुत सुंदर लग रही थीं। आकाश में पक्षियों का झुंड उड़ता हुआ जा रहा था। 

         इस प्रकार सागर तट की भव्य शोभा ने हमारा मन मोह लिया। सागर की लहरों की मस्ती और वातावरण की रौनक दिल में लिए हम अपने घर की ओर लौट पड़े।

May 28, 2022

एस. टी. स्टैंड का दृश्य

               एस. टी. स्टैंड का दृश्य 

मुझे अलीबाग जाना था। बस पकड़ने के लिए मैं एस. टी. स्टैंड पहुँचा। वहाँ का दृश्य बहुत मजेदार था।

        एक बड़े मैदान के चारों ओर ऊँची दीवार बनाकर यह एस. टी. स्टैंड बनाया गया था। यहाँ से अलग-अलग स्थानों पर जाने वाली बसें आती-जाती थीं। अलग-अलग बसों के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म बनाए गए थे। 

      एस. टी. स्टैंड के एक और विशाल इमारत थी। इसमें विभिन्न कार्यालय थे। सबसे पहले नियंत्रण कक्ष था। उसके पास ही ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए विश्रामगृह बना हुआ था। 

       एस. टी. स्टैंड में एक अच्छी-सी कैंटीन भी थी। कैंटीन के बाहर यात्रियों के बैठने के लिए एक विशाल प्रतीक्षा गृह था। प्रतीक्षा गृह में बहुत-सी बेंचें थीं। इन बेंचों पर बैठे लोग अपनी-अपनी बसों का इंतजार कर रहे थे। प्रतीक्षा-गृह में ठंडे पानी का कूलर लगा था।

       एस. टी. स्टैंड में हर जगह यात्रियों की भारी भीड़ थी। कुछ यात्री बाहर से आने वाली बसों से उतर रहे थे। कुछ लोग जाने वाली बसों की प्रतीक्षा कर रहे थे। जाने वाली बस रवाना होने से दस मिनट पहले ही प्लेटफार्म पर लग जाती थी। बस आते ही उस बस से यात्रा करने वाले यात्री कतार में खड़े हो जाते। कंडक्टर यात्रियों को बारी-बारी से टिकट देता जाता। यात्री टिकट लेकर अपनी सीट पर बैठ जाते। 

      कुछ कुली यात्रियों का सामान बस पर चढ़ाने-उतारने में व्यस्त थे। कुछ यात्री अखबार के स्टाल से अखबार और पत्रिकाएँ खरीद रहे थे। 

     एस. टी. स्टैंड के बाहर मिठाई, फल, खिलौने आदि की दुकानें थीं। पान-सिगरेट की दुकानों पर काफी भीड़ थी। कुछ भिखारी कटोरे लेकर भीख माँग रहे थे।

       सचमुच, एस. टी. बस स्टैंड की चहल-पहल देखने लायक थी। अब मेरी बस प्लेटफार्म पर लग गई थी। घंटी बजते ही मेरी बस चल पड़ी। धीरे-धीरे एस. टी. बस स्टैंड पीछे छूटता गया। पर उसके दृश्य अब भी आँखों के सामने घूम रहे थे।